This Ganesh Shabar mantra bestows unlimited wealth and property. Practitioners who want to accumulate wealth in their lives can surely apply this Shabar mantra. This practice promotes health, riches, success in one's undertakings, triumph over foes and barriers, spiritual progress, and familial happiness and tranquility.
Lord Ganesha is depicted with an elephant head and four arms, and is often associated with new beginnings, wisdom, and good fortune.
This Ganesh Shabar mantra is designed to bestow unlimited wealth and property, promoting health, riches, success, triumph over adversaries, spiritual growth, and family happiness.
How to chant the Ganesh Shabar mantra
• The Ganesh Shabar mantra can be initiated on any Wednesday.
• Perform Guru Puja and Ganesh Puja daily before chanting the mantra.
• Place one Gomati Chakra on each side of the Ganesh idol during worship.
• Include worship of goddesses Riddhi and Siddhi alongside Lord Ganesh.
• Ensure the idol is made of clay.
• Light an oil lamp before chanting.
• Chant the mantra five malas daily using a red sandalwood mala.
• This practice should be conducted for a duration of 11 days.
On the final day, give cosmetics to the goddesses Riddhi Siddhi at the Ganesh temple and dedicate the Gomati Chakra to Lord Ganesh. Within a few days, you will have opportunities to obtain wealth and achieve Riddhi Siddhi.
Ganesh Shabar mantra
om ganapati yahaan pathaoon tahaan jaavo das kos aage ja dhaee kos peechhe ja das kos sajje das kos khabbe maiya guphpha kee aagya maan riddhi siddhi devee aan agar sagar jo na aave to maata paaravatee kee laaj ! om shreem phat svaaha !
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यह गणेश शाबर मन्त्र देता है असीम धन सम्पत्ति।
जो साधक जीवन में धन प्राप्ति की आकांक्षा रखते हैं उन्हें इस शाबर मन्त्र का प्रयोग अवश्य ही करना चाहिए। इस प्रयोग को करने से व्यक्ति को जीवन में स्वास्थ्य, धन, कार्यों में सफलता, शत्रुओं, बाधाओं पर पर विजय, अध्यात्मिक उन्नति, पारिवारिक सुख शांति की प्राप्ति होती है |
यह गणेश शाबर मन्त्र किसी भी बुधवार से प्रारम्भ किया जा सकता है। गणेश शाबर मंत्र के जप से पूर्व हर रोज गुरु पूजन और गणेश पूजन करे, गणेश जी की मूर्ति के दोनों तरफ एक एक गोमती चक्र अवश्य रखे ।
गणेश जी के साथ देवी रिद्धि और सिद्धि का भी पूजन करें । पूजा में प्रयास करें मूर्ति मिटटी से बनी हुई ही हो । अपने सामने तेल का दीपक प्रज्वलित करें और लाल चन्दन माला से पाँच माला मंत्र जप नित्य करें। इस प्रयोग को केवल 11 दिनों तक करना है।
और धन प्रदान करने वाला यह शाबर मन्त्र इस प्रकार है।
"ओम ॐ गणपति यहाँ पठाऊं तहां जावो दस कोस आगे जा ढाई कोस पीछे जा दस कोस सज्जे दस कोस खब्बे मैया गुफ्फा की आज्ञा मान रिद्धि सिद्धि देवी आन अगर सगर जो न आवे तो माता पारवती की लाज ! ॐ श्रीम फट् स्वाहा ! "
अंतिम दिन देवी रिद्धि सिद्धि के लिए श्रृंगार का सामान गणेश मंदिर में चढ़ाये और वो गोमती चक्र भी गणेश जी को समर्पित कर दें। कुछ ही दिनों में आपको धन प्राप्ति के अवसर प्राप्त हो जायेंगे और रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति भी होगी।
Another Ganesha Shabar mantra
लक्ष्मी-सरस्वती-ऋद्धि-सिद्धि के लिए अमोघ मंत्र है 108 बार रुद्राक्ष की माला से जाप करें । शिव परिवार और सरस्वती, लक्ष्मी जी की फोटो लगाकर शुद्ध देशी घी का दीपक जला कर किसी भी शुभ महूरत में सुबह भोर वेला में इसका पाठ करना चाहिये । इस पाठ के करने से हर मनोवांछित फल प्राप्त होता है ।
"ॐ गुरुजी ॐ कंठ बसे सरस्वती ह्रदय देव महेश भुला अक्षर ज्ञान का जोत कला प्रकाश, सिद्ध गौरी नन्द गणेश बुध को विनायक सिमरिये बल को सिमरिये हनुमंत, ऋद्ध-सिद्ध को श्री ईश्वर महादेव जी सिमरिये, श्री गंगा गौरी पार्वती माई जी तुम्हारे कन्त उमा देवी गौरजा पार्वती भस्मन्ती देवी हिरख मन अगर कुंकुम केशर कस्तुरी मिला कूपिया तिस्ते भया, एक टीका अमर सेंचो जी जीव संचिया शक्त्त स्वरूपी हाथ धरिया नाम धारियो श्री गणपतनाथ पूता जी तुम बैठो स्थान में जावा नहावण आवण-जावण किसी को न दीजिये अंकुश मारपर संग लीजिये । बण खण्ड मध्ये से आए श्री ईश्वर महादेव छूटी ललकार ईश्वर देख बालक क्रोप भरिया ज्यो घृत बसन्तर धरिया शिवजी आणि मन सा रीस फिरयो चक्र ले गयो शीश तीन भवन से भई हलूल श्री गंगा गौरजा पार्वती माई जी आ कहने लगी स्वामी जी पुत्र मारिया तिसका कौन विचार देवी जी मै नहीं जानो तुमरा पूत मै जानो कोई दैत्य न दूत गज हस्ती का शीश लियाऊं, काट आन अलख निरंजन के पास बिठाऊं, शंकर जी ल्याये हस्ती का शीश श्री गंगा गौरजा पार्वती माई जी करी असीस जब गनपट उठन्ते खेल करन्ते, महिमा उवरन्ते गणपत बैठे स्थान मकान उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम ल्याये श्री गंगा गौरजा पार्वती माई जी के आगे स्वामी जी तुम तो सिमरे सोची मोची तेली तंबोली ठठीहरा गनिहारा लुहारा क्षेत्र सिमरे क्षेत्रपाल अजुनी शंभू सिमरे महाकाल लाम्बी सूँड बालक भेष प्रथमे सिमरो आद गणेश पाँच कोस ऋद्ध उत्तर से ल्याऊं, पाँच कोस ऋद्ध दक्षिण से ल्याऊं, पाँच कोस ऋद्ध पूर्व से ल्याऊं, पाँच कोस ऋद्ध पश्चिम से ल्याऊं, दस कोस ऋद्ध अज गायब से ल्याऊं, इतनी ऋद्ध-सिद्ध दिये बिना न जाऊँ श्री गंगा गौरजा पार्वती माई जी तुम्हारी माया प्रथमे एक दन्त, द्वितीय मेघवर्ण, तृतीय गज करण, चतुर्थ लंबोधर, पंचमे विघ्नहरण, षष्टमे धूम्ररूप, सप्तमे विनायक, अष्टमे भालचंद्र, नवमे शील संतोष, दशमे हस्तमुख, एकादशे द्वारपाल, द्वादशे वरदायक एते गणपत गणेश नाम द्वादश सम्पूर्ण भया । श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश ।"
Another Ganpati Shabar Mantra
विधि- सामग्रीः- धूप या गुग्गुल, दीपक, घी, सिन्दूर, बेसन का लड्डू। दिनः- बुधवार, गुरुवार या शनिवार। निर्दिष्ट वारों में यदि ग्रहण, पर्व, पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ-सिद्धि योग हो तो उत्तम। समयः- रात्रि १० बजे। जप संख्या-१२५। अवधिः- ४० दिन। किसी एकान्त स्थान में या देवालय में, जहाँ लोगों का आवागमन कम हो, भगवान् गणेश की षोडशोपचार से पूजा करे। घी का दीपक जलाकर, अपने सामने, एक फुट की ऊँचाई पर रखे। सिन्दूर और लड्डू के प्रसाद का भोग लगाए और प्रतिदिन १२५ बार उक्त मन्त्र का जप करें। प्रतिदिन के प्रसाद को बच्चों में बाँट दे। चालीसवें दिन सवा सेर लड्डू के प्रसाद का भोग लगाए और मन्त्र का जप समाप्त होने पर तीन बालकों को भोजन कराकर उन्हें कुछ द्रव्य-दक्षिणा में दे। सिन्दूर को एक डिब्बी में सुरक्षित रखे। एक सप्ताह तक इस सिन्दूर को न छूए। उसके बाद जब कभी कोई कार्य या समस्या आ पड़े, तो सिन्दूर को सात बार उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर अपने माथे पर टीका लगाए। कार्य सफल होगा।
मन्त्रः- “ॐ गनपत वीर, भूखे मसान, जो फल माँगूँ, सो फल आन। गनपत देखे, गनपत के छत्र से बादशाह डरे। राजा के मुख से प्रजा डरे, हाथा चढ़े सिन्दूर। औलिया गौरी का पूत गनेश, गुग्गुल की धरुँ ढेरी, रिद्धि-सिद्धि गनपत धनेरी। जय गिरनार-पति। ॐ नमो स्वाहा।